शाम की सुंदरता

 शाम की सुंदरता बख़ूबी बयाँ करे,

सूरज की आगमन से आसमान रंगीन हो जाए।

समुद्र के किनारे घुमक्कड़ एक छाती लगाए,

प्रकृति की गोदी में हैं मन भरे ख़्वाब बिखराए।


पानी के तल से उभरते हैं तारे चमकीले,

चंद्रमा की चाँदनी से बनता है नज़ारा रामी।

हरियाली छाई है धरती पर शांति अनूठी,

प्रेम की साँसों में बसी शाम है नए आगमन की धुनी।


बिताई हुई दिन की यादें ताजगी से भर जाएं,

आत्मा को शांति मिले, दुखों की रातें ढल जाएं।

सांझ की मिठास से सजे हैं फूल गुलाबी,

प्रकृति का रंगीन नृत्य है मन को मोह जाएं।


शाम की ख़ुशबू बागों को महका रही है,

पंछियों की सरगम बहारों को झलका रही है।

हो रही है धरा को गोदी में सुलाहट आराम से,

शांत वातावरण में आत्मा अब ध्यान लगा रही है।


धीरे-धीरे ढलती हुई शाम बिखराए ख़्वाबों को,

प्रेम और शांति से भरे हृदय को गले लगाए।

शाम की चांदनी से जगमगाता है आसमान,

बिताए गुज़रे वक़्त को आभारी हूँ इस धरा-वन।

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