अभिलाषा का सफर
ख्वाबों की उड़ान छोड़ते हैं हम,
अभिलाषाओं के सफर पर निकलते हैं हम।
चलना है हमें ऊंचाइयों की ओर,
जीतना है खुद को और दुनिया को आज़ाद।
धैर्य और मेहनत से जीते हैं हम,
अभिलाषाओं के सफर में बनते हैं हम।
संघर्षों से नहीं हम डरते,
आगे बढ़ने के सपनों से डरते हैं हम।
उठाते हैं हम अभिलाषा का ज्वार,
हार नहीं मानते हम, जीतते हैं हम।
उड़ान भरने के हैं हम प्रगति के पंख,
अभिलाषा का सफर है हमारा अंग-संग।
पूर्ण करने को हैं हम आरजूओं की डाढ़,
अभिलाषा हमारी है अग्नि, जलते हैं हम।
बढ़ते हैं हम सपनों की उड़ान पर,
अभिलाषाएं हैं हमारी मोती चमकते हैं हम।
आगे बढ़ते हैं हम अभिलाषा की राह पर,
जीते हैं हम खुद को, सारे जहां को जीतते हैं हम।
Comments
Post a Comment